भारतीय घरेलू क्रिकेट में Chinmay Sutar ने ऐसी पारी खेली है, जिसने रणजी ट्रॉफी के रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा दिया। मिजोरम की ओर से खेलते हुए 29 वर्षीय बल्लेबाज ने नगालैंड के खिलाफ 400 रन की नाबाद पारी खेली। इस उपलब्धि के साथ वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रन का आंकड़ा छूने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले महाराष्ट्र के बाबासाहेब निंबालकर ने दिसंबर 1948 में काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे।
दीमापुर में खेली गई इस ऐतिहासिक पारी में चिन्मय ने 517 गेंदों का सामना करते हुए 46 चौके और 7 छक्के लगाए। उनकी बल्लेबाजी ने न केवल मिजोरम की पारी को मजबूती दी, बल्कि रणजी ट्रॉफी में व्यक्तिगत स्कोर के बड़े रिकॉर्ड को भी नया रूप दिया। उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर को पीछे छोड़ दिया और टूर्नामेंट की एक पारी में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए।
दूसरे फर्स्ट क्लास मैच में ही 400 रन का बड़ा कारनामा
चिन्मय सुतार की इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि वह अपना दूसरा ही फर्स्ट क्लास मैच खेल रहे थे। इतने कम मैचों के अनुभव में 400 रन की नाबाद पारी खेलना उनके धैर्य, एकाग्रता और लंबी पारी खेलने की क्षमता को दर्शाता है। 517 गेंदों तक क्रीज पर टिके रहकर उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों का सामना किया और लगातार रन जुटाए।
उनकी पारी में चौकों और छक्कों की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि वह केवल रक्षात्मक बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रहे। लंबी पारी के दौरान उन्होंने जरूरत के मुताबिक आक्रामक शॉट भी खेले। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बड़ी पारियां खेलने के लिए तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। चिन्मय की यह पारी इन सभी पहलुओं का उल्लेखनीय उदाहरण बन गई।
पृथ्वी शॉ का 379 रन का रिकॉर्ड पीछे छूटा
रणजी ट्रॉफी में व्यक्तिगत स्कोर के लिहाज से चिन्मय की पारी बेहद महत्वपूर्ण है। 400 रन नाबाद बनाकर उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर को पीछे छोड़ दिया। इस तरह वह रणजी ट्रॉफी की एक पारी में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए।
घरेलू क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड खिलाड़ियों की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ उनकी टीम के प्रदर्शन को भी नई पहचान देते हैं। चिन्मय की पारी ने मिजोरम की बल्लेबाजी को मजबूती दी और टूर्नामेंट के रिकॉर्ड में एक नया अध्याय जोड़ा। 400 रन तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय बनना इस पारी को और ऐतिहासिक बनाता है।
आखिरी विकेट के लिए 189 रन की साझेदारी
इस पारी का एक और अहम पहलू आखिरी विकेट के लिए हुई 189 रन की साझेदारी रही। क्रिकेट में अंतिम विकेट के लिए इतनी बड़ी साझेदारी विपक्षी टीम की रणनीति को मुश्किल में डाल सकती है और मैच का रुख बदल सकती है। चिन्मय की लंबी पारी के साथ इस साझेदारी ने मिजोरम की पारी को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की।
आखिरी विकेट पर बल्लेबाजी करते हुए रन जुटाना आसान नहीं होता, क्योंकि दूसरे छोर पर बल्लेबाज के आउट होते ही पारी समाप्त हो जाती है। ऐसे में एक-एक रन और हर साझेदारी का महत्व बढ़ जाता है। इस मुकाबले में आखिरी विकेट के लिए 189 रन जुड़ना पारी की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल रहा।
मुंबई छोड़कर मिजोरम की टीम में शामिल हुए चिन्मय
चिन्मय सुतार ने 2026-27 सीजन से पहले मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेकर मिजोरम की टीम जॉइन की थी। इस बदलाव के बाद उन्हें मिजोरम की ओर से घरेलू क्रिकेट में खेलने का अवसर मिला। उनकी मौजूदा उपलब्धि ने इस फैसले के बाद उनके प्रदर्शन को विशेष चर्चा में ला दिया है।
मिजोरम के लिए रणजी ट्रॉफी में अपने डेब्यू मैच में चिन्मय ने मणिपुर के खिलाफ पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 99 रन बनाए थे। हालांकि, उस मुकाबले में उनकी टीम को तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। डेब्यू मैच में दोनों पारियों में उपयोगी योगदान देने के बाद अब 400 रन की नाबाद पारी ने उनके प्रदर्शन को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
विजय हजारे ट्रॉफी और मुंबई T20 लीग में भी दिखाया दम
चिन्मय सुतार का घरेलू क्रिकेट में सफर केवल रणजी ट्रॉफी तक सीमित नहीं रहा है। इस साल वह विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई की ओर से भी खेले। इसके अलावा जून में मुंबई T20 लीग के दौरान उन्होंने मराठा रॉयल्स को खिताब बचाने में मदद की।
मुंबई T20 लीग में चिन्मय ने लगातार दो अर्धशतक लगाए और छह पारियों में 212 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट लगभग 120 रहा। सीमित ओवरों के क्रिकेट में रन बनाने की उनकी क्षमता और अब फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लंबी पारी खेलने की उपलब्धि उनके खेल के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है।
टी20 क्रिकेट में तेजी से रन बनाना और फर्स्ट क्लास मैच में सैकड़ों गेंदों तक बल्लेबाजी करना अलग तरह की चुनौतियां हैं। चिन्मय की 400 रन की पारी ने दिखाया कि वह लंबी पारी खेलने के लिए जरूरी धैर्य और एकाग्रता भी प्रदर्शित कर सकते हैं।
78 साल पहले बाबासाहेब निंबालकर ने बनाया था भारतीय रिकॉर्ड
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की चर्चा बाबासाहेब निंबालकर के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बिना पूरी नहीं हो सकती। दिसंबर 1948 में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए निंबालकर ने काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। उनकी पारी में 49 चौके और एक छक्का शामिल था।
उस मुकाबले में काठियावाड़ ने पहली पारी में 238 रन बनाए थे। इसके जवाब में महाराष्ट्र ने 826 रन पर चार विकेट के स्कोर तक पहुंचकर अपनी पारी घोषित नहीं की थी। निंबालकर तीसरे दिन 443 रन बनाकर नाबाद थे और उस समय फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डॉन ब्रैडमैन के 452 रन के विश्व रिकॉर्ड से आगे निकलने के बेहद करीब थे।
निंबालकर की पारी भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास की सबसे चर्चित उपलब्धियों में गिनी जाती है। लगभग 78 साल बाद चिन्मय सुतार का 400 रन तक पहुंचना उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की याद दिलाता है और भारतीय क्रिकेट में बड़ी व्यक्तिगत पारियों की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
डॉन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड टूटने से रह गया था
निंबालकर जब 443 रन पर नाबाद थे, तब डॉन ब्रैडमैन का 452 रन का फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड उनके सामने था। वह इस आंकड़े से केवल नौ रन दूर थे। लेकिन मैच के तीसरे दिन लंच के बाद काठियावाड़ के कप्तान ने महाराष्ट्र द्वारा पारी घोषित नहीं किए जाने पर मैदान में उतरने से इनकार कर दिया।
विवरण के अनुसार, महाराष्ट्र के कप्तान राजा गोखले और अंपायरों ने काठियावाड़ की टीम से कुछ और ओवर खेलने की अपील की, ताकि निंबालकर को रिकॉर्ड तोड़ने का अवसर मिल सके। हालांकि, काठियावाड़ की टीम मैदान छोड़कर चली गई और मैच गंवा दिया। इस घटनाक्रम के कारण निंबालकर का स्कोर 443 रन नाबाद पर ही रुक गया और ब्रैडमैन का रिकॉर्ड उस समय बरकरार रहा।
यह प्रसंग क्रिकेट इतिहास की उन घटनाओं में शामिल है, जिनमें किसी खिलाड़ी की असाधारण उपलब्धि के बावजूद रिकॉर्ड टूटने से रह गया। निंबालकर की पारी आज भी भारतीय फर्स्ट क्लास क्रिकेट के सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिनी जाती है।
चिन्मय की पारी ने फिर चर्चा में ला दिया घरेलू क्रिकेट को
चिन्मय सुतार की नाबाद 400 रन की पारी ने एक बार फिर भारतीय घरेलू क्रिकेट की अहमियत को सामने रखा है। रणजी ट्रॉफी जैसे लंबे प्रारूप में खिलाड़ियों को अपनी तकनीक, धैर्य और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है। ऐसी पारियां केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बनातीं, बल्कि खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुंबई जैसे मजबूत क्रिकेट ढांचे से निकलकर मिजोरम की टीम के लिए खेलते हुए चिन्मय ने अपने प्रदर्शन से ध्यान आकर्षित किया है। दूसरे फर्स्ट क्लास मैच में 400 रन तक पहुंचना उनके करियर का बड़ा पड़ाव है। आने वाले मुकाबलों में उनका प्रदर्शन किस तरह आगे बढ़ता है, इस पर क्रिकेट प्रेमियों की नजर रहेगी।
चिन्मय सुतार ने नगालैंड के खिलाफ 517 गेंदों पर नाबाद 400 रन बनाकर भारतीय फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वह यह आंकड़ा छूने वाले दूसरे भारतीय बने और रणजी ट्रॉफी में पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर से आगे निकल गए। उनसे पहले बाबासाहेब निंबालकर ने 1948 में नाबाद 443 रन बनाए थे—एक ऐसा रिकॉर्ड, जो आज भी भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास का खास हिस्सा है।
