युवाओं में बढ़ रहा Heart Attack का खतरा! दिल की तेज धड़कन को न करें नजरअंदाज, 35 साल से कम उम्र के 21% मरीजों ने बढ़ाई चिंता


Heart Attack । फिल्मों में दिल का तेजी से धड़कना अक्सर प्यार की पहली निशानी के तौर पर दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक जिंदगी में दिल का अचानक या बार-बार तेज धड़कना कभी-कभी शरीर की ओर से मिलने वाला चेतावनी संकेत भी हो सकता है। खासकर अगर इसके साथ सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर, कमजोरी या असामान्य थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे सामान्य मानकर टालना ठीक नहीं है।

युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियों को लेकर सामने आए आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की कैथ लैब में पिछले 18 महीनों के दौरान हुई 2,402 हृदय प्रक्रियाओं में करीब 21 फीसदी मरीज 35 साल से कम उम्र के थे। यह आंकड़ा बताता है कि हृदय संबंधी समस्याएं अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गई हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक तनावपूर्ण जीवनशैली, खान-पान में गड़बड़ी, बढ़ता वजन, धूम्रपान और शराब का सेवन जैसे कई कारक कम उम्र में हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा एक बड़ी समस्या यह भी है कि युवा अक्सर शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते और जांच या उपचार को टालते रहते हैं।

35 साल से कम उम्र के 21 फीसदी मरीज, क्यों बढ़ रही चिंता?

एसएन मेडिकल कॉलेज की कैथ लैब में 18 महीनों के दौरान कुल 2,402 हृदय प्रक्रियाएं की गईं। इनमें 21 फीसदी मरीज 35 वर्ष से कम उम्र के रहे।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आम तौर पर युवावस्था को हृदय स्वास्थ्य के लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित उम्र माना जाता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और कई जोखिम कारकों के कारण कम उम्र में भी हृदय संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं।

हालांकि किसी व्यक्ति में हृदय रोग का कारण केवल उम्र के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। अलग-अलग मरीजों में जोखिम कारक अलग हो सकते हैं। लेकिन युवा मरीजों की बढ़ती हिस्सेदारी इस बात की ओर जरूर ध्यान खींचती है कि हृदय स्वास्थ्य को लेकर कम उम्र में भी सावधानी जरूरी है।

दिल की धड़कन तेज होना कब बन सकता है चेतावनी संकेत?

दिल की धड़कन का तेज होना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। व्यायाम करने, दौड़ने, घबराहट, तनाव, कैफीन या कुछ अन्य परिस्थितियों में भी दिल सामान्य से तेज धड़क सकता है।

समस्या तब हो सकती है जब दिल की धड़कन बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार तेज हो, लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दें।

अगर तेज धड़कन के साथ सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, अत्यधिक कमजोरी या ठंडा पसीना जैसे लक्षण हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

युवाओं में हार्ट अटैक के पीछे कौन से बड़े कारण?

कम उम्र में हृदय संबंधी बीमारी का जोखिम कई कारणों से बढ़ सकता है। इनमें कुछ जीवनशैली से जुड़े हैं, जबकि कुछ जोखिम आनुवंशिक या चिकित्सकीय कारणों से भी हो सकते हैं।

तनाव और लगातार मानसिक दबाव

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम, पढ़ाई, आर्थिक दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और व्यक्तिगत समस्याएं लंबे समय तक तनाव का कारण बन सकती हैं।

लगातार तनाव शरीर पर कई तरह से असर डाल सकता है। तनाव के दौरान शरीर में ऐसे हार्मोन और रासायनिक बदलाव होते हैं, जो हृदय गति और रक्तचाप को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ यदि नींद की कमी और खराब जीवनशैली भी जुड़ जाए तो जोखिम और बढ़ सकता है।

इसलिए लगातार तनाव को केवल मानसिक परेशानी मानकर छोड़ देना उचित नहीं है। तनाव को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित दिनचर्या और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद महत्वपूर्ण हो सकती है।

खराब खान-पान भी बढ़ा सकता है जोखिम

फास्ट फूड, अत्यधिक तला-भुना भोजन, अधिक नमक, अधिक चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ऐसा खान-पान वजन बढ़ने, उच्च रक्तचाप, खराब कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों से जुड़ सकता है। ये सभी आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

युवाओं में खास तौर पर बाहर का भोजन, देर रात खाना और अनियमित भोजन की आदतें तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

मोटापा और बढ़ता वजन

कम शारीरिक गतिविधि और अधिक कैलोरी वाला भोजन युवाओं में वजन बढ़ने की बड़ी वजह बन सकता है। मोटापा अपने आप में कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है और इसके साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां भी विकसित हो सकती हैं।

इसलिए शरीर का वजन बढ़ने को केवल दिखावट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। स्वस्थ वजन बनाए रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

धूम्रपान को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

धूम्रपान हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों में मौजूद रसायन रक्त वाहिकाओं और हृदय प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

युवा उम्र में धूम्रपान शुरू करने वाले व्यक्ति अक्सर इसे बाद में छोड़ने की सोचते हैं, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए धूम्रपान छोड़ना हृदय स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शराब का सेवन भी जोखिम से जुड़ सकता है

अत्यधिक शराब का सेवन रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कुछ लोगों में यह हृदय की धड़कन में अनियमितता से भी जुड़ा हो सकता है।

युवाओं में शराब का नियमित या अत्यधिक सेवन यदि खराब खान-पान, धूम्रपान, कम नींद और शारीरिक निष्क्रियता के साथ जुड़ जाए तो स्वास्थ्य पर कई स्तरों पर असर पड़ सकता है।

सबसे बड़ी गलती: लक्षणों को नजरअंदाज करना

युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं का एक गंभीर पहलू यह है कि कई लोग शुरुआती संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्हें लगता है कि कम उम्र में हार्ट की बीमारी हो ही नहीं सकती।

यही सोच खतरनाक हो सकती है।

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सीने में दर्द या दबाव, असामान्य सांस फूलना, अचानक कमजोरी, चक्कर, बेहोशी, असामान्य थकान या धड़कन तेज होने जैसी समस्या हो रही है, तो इसका कारण जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हर तेज धड़कन या सीने की तकलीफ हार्ट अटैक नहीं होती, लेकिन इसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

हार्ट अटैक और तेज धड़कन में क्या संबंध है?

हार्ट अटैक के दौरान कुछ मरीजों में दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है, लेकिन तेज धड़कन अपने आप में हार्ट अटैक का प्रमाण नहीं है। कई अन्य स्थितियां भी हृदय गति बढ़ा सकती हैं।

इसीलिए सोशल मीडिया या इंटरनेट पर किसी एक लक्षण को देखकर खुद बीमारी तय करना सही तरीका नहीं है। लक्षण लगातार बने रहें, बार-बार हों या अन्य चेतावनी संकेतों के साथ दिखाई दें तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।

सीने में दर्द हो तो कब तुरंत मदद लें?

अगर सीने में अचानक तेज दबाव या दर्द हो और वह कुछ मिनटों से अधिक समय तक बना रहे, या दर्द के साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्या हो, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी की तरह लेना चाहिए।

ऐसी स्थिति में खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने के बजाय स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से मदद लेना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

खास बात यह है कि हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में सीने का दर्द प्रमुख हो सकता है, जबकि अन्य में सांस फूलना, अत्यधिक थकान या दूसरे लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

युवा हैं तो भी इन चीजों पर रखें नजर

हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए कम उम्र से ही कुछ बुनियादी आदतों पर ध्यान देना उपयोगी है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

यदि परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, तो व्यक्ति को अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम के बारे में चर्चा करनी चाहिए। इसी तरह उच्च रक्तचाप, मधुमेह या कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

नियमित जांच केवल बुजुर्गों के लिए नहीं

यह धारणा कि स्वास्थ्य जांच केवल अधिक उम्र के लोगों को करानी चाहिए, सही नहीं है। हर व्यक्ति की जांच की जरूरत उसकी उम्र, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर अलग हो सकती है।

विशेषकर जिन युवाओं में मोटापा, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, असामान्य कोलेस्ट्रॉल या परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें अपने डॉक्टर से यह समझना चाहिए कि कौन-कौन सी जांच उनके लिए उचित हैं।

युवाओं के लिए सबसे जरूरी संदेश

एसएन मेडिकल कॉलेज की कैथ लैब में 18 महीनों के दौरान 2,402 हृदय प्रक्रियाओं में 35 साल से कम उम्र के मरीजों की 21 फीसदी हिस्सेदारी यह याद दिलाती है कि हृदय स्वास्थ्य को लेकर उम्र के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर युवा हार्ट अटैक के खतरे में है। बल्कि संदेश यह है कि लक्षणों को नजरअंदाज करने, खराब जीवनशैली और अनदेखे जोखिम कारकों से बचना जरूरी है।

दिल की सेहत के लिए सबसे प्रभावी कदम अक्सर रोजमर्रा की आदतों से शुरू होते हैं—संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी, शराब से सावधानी और लगातार बने रहने वाले लक्षणों पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह।

याद रखें: दिल की तेज धड़कन हमेशा हार्ट अटैक का संकेत नहीं होती, लेकिन बार-बार होने वाली या बिना वजह तेज धड़कन को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। खासकर सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, चक्कर, बेहोशी, ठंडा पसीना या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण साथ हों तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। कम उम्र में हृदय रोग का जोखिम कई कारकों से प्रभावित होता है, इसलिए स्वस्थ जीवनशैली और समय पर जांच को गंभीरता से लेना जरूरी है।



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